कंपनी का समग्र प्रबंधन निदेशक मंडल (Board of Directors) के अधीन निहित है, जो कोल इंडिया लिमिटेड ( सीआईएल ) का सर्वोच्च नीति-निर्धारण एवं निर्णय लेने वाला निकाय है। इसकी सरंचना कार्यकारी नेतृत्व, सरकारी प्रतिनिधित्व और स्वतंत्र विशेषज्ञता के संतुलित मिश्रण को दर्शाता है। निदेशक मंडल कंपनी के अंशधारकों के प्रति उत्तरदायी होता है, जो कंपनी के सर्वोच्च प्राधिकारी हैं। चूँकि कंपनी की 63.13 % इक्विटी शेयर पूंजी भारत सरकार के स्वामित्व में है, इसलिए सीआईएल एक सरकारी कंपनी है। अतः कंपनी का निदेशक मंडल भारत सरकार के प्रति भी उत्तरदायी है।
निदेशक मंडल की प्राथमिक भूमिका एक न्यासी (Trustee) के रूप में कार्य करते हुए अंशधारकों के हितों की रक्षा करना तथा उनके निवेश के मूल्य का संरक्षण एवं अधिकतम संवर्धन सुनिश्चित करना है। निदेशक मंडल कंपनी की दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा निर्धारित करता है, उसके समग्र कॉर्पोरेट प्रदर्शन की समीक्षा करता है, रणनीतिक निर्णयों को अनुमोदित एवं उनकी निगरानी करता है, वैधानिक एवं नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करता है तथा अंशधारकों के हितों का संरक्षण करता है।
निदेशक मंडल यह भी सुनिश्चित करता है कि कंपनी का संचालन इस प्रकार किया जाए जिससे सभी हितधारकों की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं की पूर्ति हो तथा समाज के प्रति कंपनी के दायित्वों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित हो।
कंपनी के दैनिक प्रशासन एवं परिचालन का दायित्व अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को सौंपा गया है, जिन्हें कार्यात्मक निदेशकों तथा कंपनी के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त होता है।
दिनांक 30.04.2026 से प्रभावी सीआईएल के निदेशक मंडल की उप-समितियों का गठन :-
निदेशक मंडल के अधीन निम्नलिखित उप-समितियाँ कार्यरत हैं—