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हमारे बारे में


कंपनी के बारे में

राज्य के स्वामित्व वाला कोयला खनन निगम कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) नवंबर 1975 में अस्तित्व में आया। इसकी स्थापना के वर्ष में 79 मिलियन टन (एमटी) के साधारण उत्पादन करने वाली सीआईएल, आज विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक तथा 2,59,016 (1 अप्रैल 2021 तक) की श्रमशक्ति के साथ सबसे बड़े कॉर्पोरेट नियोक्ता में से एक है । भारत के आठ (8) राज्यों में विस्तृत सीआईएल 85 खनन क्षेत्रों में अपनी अनुषंगी कंपनियों के माध्यम से कार्य करता है। कोल इंडिया लिमिटेड की 345 खदानें हैं (1 अप्रैल, 2021 तक) जिनमें से 151 भूमिगत, 172 ओपन कास्ट और 22 मिश्रित खदानें हैं। वर्तमान में सीआईएल 35.38 एमटीवाई की कुल धुलाई क्षमता के साथ 13 कोयला वाशरी का संचालन कर रहा है (इनमें से 11 कोकिंग कोल वाशरी तथा शेष 2 नॉन-कोकिंग कोल वाशरी हैं) तथा अन्य प्रतिष्ठानों जैसे कार्यशालाओं, अस्पतालों आदि का भी प्रबंधन करता है। सीआईएल में 20 प्रशिक्षण संस्थान और 86 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र हैं। भारतीय कोयला प्रबंधन संस्थान (आईआईसीएम) अत्याधुनिक प्रबंधन प्रशिक्षण 'उत्कृष्टता केंद्र' - भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण संस्थान - सीआईएल के अधीन कार्यरत है जो बहु-अनुशासनात्मक कार्यक्रम आयोजित करता है।

सीआईएल एक महारत्न कंपनी है – जो भारत सरकार द्वारा राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों का चयन करने, उन्हें अपने संचालन का विस्तार करने और वैश्विक दिग्गजों के रूप में उभरने के लिए सशक्त बनाने के लिए एक विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति है । इस चुनिंदा क्लब में देश के तीन सौ से अधिक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से केवल दस सदस्य हैं।

सीआईएलकी सात उत्पादक अनुषंगी कंपनियां हैं, जिनके नाम ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) है तथा सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) नामक एक खान योजना और परामर्शदात्री कंपनी भी है। इसके अलावा, सीआईएलकी मोजाम्बिक में कोल इंडिया अफ्रीकाना लिमिटाडा (सीआईएएल) नाम की एक विदेशी अनुषंगी कंपनी है। असम की खदानों अर्थात नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स का प्रबंधन प्रत्यक्ष रुप से सीआईएल द्वारा किया जाता है।

सीआईएल ने गैर-पारंपरिक/स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए दो नई अनुषंगी कंपनियों यथा सीआईएल नवी करणीय ऊर्जा लिमिटेड तथा सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के विकास के लिए सीआईएल सोलर पीवी लिमिटेड को शामिल किया है।

  • महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की चार (4) अनुषंगी कंपनियां हैं जिसमें - i) एमजेएसजे कोल लिमिटेड ii) एमएनएच शक्ति लिमिटेड, iii) महानदी बेसिन पावर लिमिटेडiv)नीलांचल पावर ट्रांसमिशन कंपनी प्राइवेट लिमिटेडहैं ।
  • एसईसीएल की दो अनुषंगी कंपनियां हैं-i) मैसर्स छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल) ii) मैसर्स छत्तीसगढ़ ईस्ट-वेस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईडब्ल्यूआरएल)
  • सीसीएल की एक अनुषंगी कंपनी - झारखंड सेंट्रल रेलवे लिमिटेड है ।

अद्वितिय सामरिक प्रासंगिकता:

सीआईएल भारत के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 83% का उत्पादनकर्ता है, देश का लगभग 57% प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा कोयले पर निर्भर है, जिसमें सीआईएल अकेले प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकता के 40% की आपूर्ति करता है । कोयले की हिस्सेदारी 2040 तक 48-54% के अधिकतम स्तर पर बने रहने की संभावना है तथा उपयोगिता क्षेत्र में ताप विद्युत उत्पादन क्षमता (थर्मल पावर जनरेटिंग कैपेसिटी) का कुल 76% हेतु जवाबदेहीता होगी । सीआईएल अंतरराष्ट्रीय मूल्यों से रियायती कीमतों पर कोयले की आपूर्ति करता है तथा भारतीय कोयला उपभोक्ताओं को मूल्य अस्थिरता से रक्षा करता है । यह उपयोगकर्ता उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है और "मेक इन इंडिया" एवं भारत निर्माण द्वारा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उत्पादन और विकास:

2020-21 के दौरान,सीआईएल ने चुनौतीपूर्ण और प्रतिकूल परिस्थितियों में 596.22 मिलियन टन कोयले का उत्पादन कर लक्ष्य का 90% प्राप्त किया है ।एनसीएल ने विगत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.5% द्धि करते हुए लक्षित उत्पादन का 102 प्रतिशत हासिल किया है । एसईसीएल ने लगातार तीसरे वर्ष 150 मिलियन टन से अधिक का उत्पादन करने का गौरव बरकरार रखा और एमसीएल ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.5% की वृद्धि के साथ 148.01 मिलियन टन का उत्पादन हासिल किया। 31 मार्च, 2021 को समाप्त वित्त वर्ष में कच्चे कोयले का उठाव 574.481 एमटी और अधिभार निकासी (ओबीआर) 1344.68 मि.क्यू.मी. रहा।2020-21 के दौरान कोयले और कोयला उत्पादों का प्रेषण 573.60 मिलियन टन तथा विद्युत उपयोगिताओं (विशेष फॉरवर्ड ई-नीलामी सहित) को प्रेषण 444.97 मीट्रिक टन रहा।

परियोजनाएं:

890.41 मिलियन टन की वार्षिक क्षमता वाली 122 खनन परियोजनाएं चल रही हैंजिन्होंने वर्ष 2020-21 में 417.07 मिलियन टनका योगदान दिया है।1 बिलियन टन योजना के अनुसार,वित्त वर्ष 2023-24 तक सीआईएलके कोयला उत्पादन को 1 बिलियन टन तक बढ़ाने के लिए 289.4 मिलियन टन प्रतिवर्षकी वृद्धिशील क्षमता वाली उनतालीस (49) भावी परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है।

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी:

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी के विकास और कोयले के वैकल्पिक उपयोग की दिशा में पहल के तहत, सीआईएल दानकुनी कोल कॉम्प्लेक्स (डीसीसी) में कोल-टू-मेथनॉल संयंत्र स्थापित करके एकल आधार पर कोयला-से-रसायन क्षेत्र में उद्यम की संभावनाएं तलाशी जा रही है । रानीगंज कोयला क्षेत्रों से प्राप्त कोयले को सिन्गैस उत्पादन के लिए गैसीकृत किया जाएगा, तदुपरांत उसे मेथनॉल में परिवर्तित किया जाएगा ।

उपभोक्ता संतुष्टि:

उपभोक्ता संतुष्टि सीआईएल के लिए एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने के लिए खदान से लेकर प्रेषण बिंदु तक कोयले के गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है।सीआईएल के सभी उपभोक्ताओं को स्वतंत्र तृतीय-पक्ष नमूना एजेंसियों के माध्यम से गुणवत्ता मूल्यांकन कराने का विकल्प है।सीआईएल द्वारा एक पोर्टल 'उत्तम' लॉन्च किया गया है ताकि कोयला कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए कोयले की गुणवत्ता की जानकारी सुलभ हो सके।

जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन तक पहुँच:

विश्व के अन्य हिस्सों से भिन्न, भारत में कोयला भंडार ज्यादातर जंगली भूमि क्षेत्रों या जनजातीय निवास क्षेत्रों में स्थित है । कोयला खनन करने के लिए लोगों को अनिवार्य रूप से विस्थापित होना पड़ता है, परंतु परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए सीआईएल ने संरचित पुनर्वास और पुनःस्थापन की नीति अपनाई है । कंपनी द्वारा ‘मानवीयता के साथ खनन' की प्रक्रिया को अपनाया गया है जिसमें सामाजिक रूप से स्थायी समावेशी विकास मॉडल के तहत आजीविका संबंधी निर्णय लेने की प्रक्रिया में परियोजना प्रभावित लोगों को हितधारक बनाया जाता है ।

पर्यावरण संरक्षण/ पर्यावरण प्रबंधन

सीआईएल पर्यावरण के साथ अपने संचालन के तदात्म्य को बढ़ाने तथा एकीकृत कोयला खनन को बढ़ाने के अपने दायित्व के प्रतिसतत प्रतिबद्ध है ।कोल इंडिया द्वारा प्रतिबर्ष ओबी डंपों पर, ढुलाई सड़कों के किनारे, खदानों, आवासीय कॉलोनियों और अन्य उपलब्ध भूमि पर व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।मार्च 2021 तक लगभग 40,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लगभग 100 मिलियन पेड़ लगाए गए हैं।2020-21 के दौरान, 861.81 हेक्टेयर भूमि को आच्छादित करते हुए 1.98 मिलियन पेड़ लगाए गए हैं।वित्त वर्ष 2021-22 में, सीआईएल ने लगभग 1310 हेक्टेयर भूमि में देशी/स्थानीय प्रजातियों को लगाने का लक्ष्य रखा है।सीआईएल ने वैज्ञानिक अध्ययन के लिए आईसीएफआरई तथा एनईईआरआई जैसे प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन किया है तथा देशी प्रजातियों के साथ पारिस्थितिकी-पुनर्स्थापन स्थलों और त्रि-स्तरीय वृक्षारोपण के विकास में भी सहायता की है।

सीआईएल मुख्यालय भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से आईएसओ 9001, 14001, और 50001 (गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) प्रमाणन प्राप्त है।31 मई 2021 तक,हमारी चार अनुषंगी कंपनियां, ईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और डब्ल्यूसीएल एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ 9001:2015, आईएसओ 14001:2015 और ओएचएसएएस 18001:2017) के लिए प्रमाणित हैं।सीएमपीडीआई मुख्यालय और इसके सात आरआई आईएसओ 9001:2015 के लिए प्रमाणित हैं। इसके अलावा, सीएमपीडीआई मुख्यालय, रांची को आईएसओ 37001:2016 से प्रमाणित किया गया है।

ऊर्जा संरक्षण:

सीआईएल के लिए ऊर्जा संरक्षण एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और विशिष्ट ऊर्जा खपत में कमी लाने की दिशा में विभिन्न उपाय किए गए हैं। खदान की रोशनी, भूमिगत प्रकाश, सड़कों पर प्रकाश, कार्यालय और अन्य कार्य स्थल, उपनगर आदि के लिए अधिकांश स्थानों पर उच्च वॉट क्षमता वाले प्रकाशमान / पारंपरिक प्रकाश फिटिंग को उपयुक्त वॉट क्षमता वाले कम बिजली की खपत वाले एलईडी के साथ बदल दिया गया है जिसके परिणामस्वरूप बिजली की खपत में क्षमता बड़ी बचत आई है। 2020-21 में लगभग रु. 8 करोड़ की ऊर्जा लागत बचत के साथ विभिन्न वॉट क्षमता रेटिंग वाले 98,522 एलईडी प्रकाश (ईसीएल-5752, एमसीएल-18378, डब्ल्यूसीएल-9490, एनसीएल-32207, बीसीसीएल-5000, एसईसीएल-18521, सीसीएल-6000, सीएमपीडीआईएल-790 और सीआईएल मुख्यालय - 2384 संख्याएँ) स्थापित किये गये हैं।

ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप मेंसौर ऊर्जा के उपयोग के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैंजैसे किलो-वॉट स्केल रूफटॉप में सोलर प्लांट सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।

2020-21 से पूर्व स्थापित सौर क्षमता: ग्राउंड माउंटेड - 2000 के डब्ल्यू (एमसीएल) और रूफ टॉप सोलर- 2862.3 के डब्ल्यू (सभी अनुषंगी कंपनियों और सीआईएलमुख्यालय सहित) है।

2020-21 में सौर क्षमता वृद्धि: बीसीसीएल में 350 किलोवॉट रूफ टॉप सोलर तथा मार्च 2021 में सीएमपीडीआई आरआई-I, नागपुर में 100 किलोवॉट रूफ टॉप सोलर शुरु किया गया था।

सीआईएल ने ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के निर्माण, ई-वाहनों को किराए पर लेने और वितरित सौर परियोजनाओं की स्थापना के लिए मेसर्स ईईएसएल (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया हैं।

उद्यम संसाधन योजना (ईआरपी):

सीआईएल, अपने तथा इसकी अनुषंगी कंपनियों में एक मजबूत अत्याधुनिक उद्यम संसाधन योजना और अस्पताल प्रबंधन प्रणाली की योजना तथा कार्यान्वयन के पथ पर है।इस प्रयास का उद्देश्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं के मानकीकरण के माध्यम से एकल उपयोगी आसान प्रणाली में व्यवसाय संचालन के सभी पहलुओं को आत्मसात करना है जो सभी संगठनात्मक संसाधन का प्रभावी रूप से योजना, प्रबंधन और अनुकूलन करेगा। 21.01.2021 को नई दिल्ली में 'प्रोजेक्ट पैशन' का चरण- I श्री प्रल्हाद जोशी, माननीय संसदीय कार्य मंत्री, कोयला और खान द्वारा उदघाटित किया गया । सीआईएल (ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल, सीएमपीडीआई, एसईसीएल, और एनसीएल) के दूसरे चरण की अनुषंगी कंपनियों में एसएपी ईआरपी का कार्यान्वयनडीपीआर में परिकल्पित 42 महीने की तुलना में 27.5 महीने के क्रैश टाइमलाइन के साथ लगभग 14 महीने पूर्वन किया जा रहा है।

परियोजना निगरानी की प्रणाली में सुधार:

सीआईएल ने कोयला परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए वेब आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली विकसित की है। पोर्टल में मुख्य विशेषताएं, भूमि, आर एंड आर, ईसी, उत्पादन, वित्तीय जानकारी, उपलब्धियों आदि से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी है। जिसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है। पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी के आधार पर परियोजनाओं प्रगति की समीक्षा की जाती है।

सीआईएल की सुरक्षा नीति

सीआईएल के मिशन उक्ति में जैसे वर्णित है सीआईएल के प्रचालनों में सुरक्षा को प्रमुख महत्व दिया गया है।खानों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीआईएल की एक सुस्पष्ट सुरक्षा नीति है।

फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी:

2023-24 तक कोल इंडिया लिमिटेड कोयले के मौजूदा सड़क परिवहन के स्थान पर अपनी वृह्द खानों में पाइप्ड कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से मशीनीकृत कोयला परिवहन शुरु करेगा। इसके लिए कंपनी ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। पैंतीस (35) एफएमसी परियोजनाएं जिनमें प्रत्येक की उत्पादन क्षमता 415 मिलियन टन प्रति वर्ष या उससे अधिक है, पहले चरण में कार्यान्वित की जा रही हैं।यह 151 मिलियन टन की संयुक्त क्षमता के साथ संचालित उन्नीस मशीनीकृत कोयला निकासी प्रणाली के अतिरिक्त है।यह कदम पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देता है तथा संभावित कोयला चोरी को रोकता है।इससे कोयले की मशीनीकृत लोडिंग भी होगी जिससे कोयले की क्रसिंग, कोयले का आकार, तीव्र और गुणवत्तापूर्ण लोडिंग पूर्व-वजन जैसे लाभ होंगे।

अक्षय ऊर्जा में प्रवेश:

सीआईएल नवकरणीय ऊर्जा लिमिटेड का गठन अक्षय ऊर्जा (गैर-पारंपरिक) भाग के क्षेत्र में उद्यम करने के लिए किया गया है। इसमें सौर, पवन, स्मॉल हाइड्रो, बायोमास, जियो-थर्मल, हाइड्रोजन, टाइडल आदि शामिल हैं। सीआईएल ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) द्वारा आयोजित प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना हासिल कर अपने नियंत्रण क्षेत्रों के बाहर अपनी पहली वाणिज्यिक सौर परियोजना प्राप्त की है।

एक अन्य अनुषंगी, सीआईएल सोलर पीवी लिमिटेड का गठन संपूर्ण सोलर पीवी विनिर्माण मूल्य श्रृंखला का नया व्यवसाय करने के लिए किया गया है।

सीआईएल में डिजिटलीकरण

सीआईएल आईटी पहलों के माध्यम से कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनी सात सबसे वृह्द खानों के पूर्ण डिजिटलीकरण का कार्य कर रहा है।

सीआईएल ने कुछ वेब/मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं

  • कोयला उपभोक्ताओं के लिए बिल-टू-बिल समाधान पोर्टल जो बिलिंग और प्राप्तियां में पूर्ण पारदर्शिता देगा।
  • एफओआईएस पोर्टल जहाँ सीआरआईएस के एफओआईएस सिस्टम से डेटा कोयला कंपनियों को ऑनलाइन दिया जाता है।
  • अवैध कोयला खनन की जांच के लिए "खनन प्रहरी",
  • विभिन्न स्थानों पर नियुक्त ठेका मजदूरों के उचित वेतन भुगतान पर नज़र रखने के लिए सीआईएल द्वारा "सीएलआईपी" कॉन्ट्रैक्ट लेबर इनफॉरमेशन पोर्टल शुरू किया गया है।
  • सीआईएल और सीएमपीडीआई, रांची के परियोजना निगरानी प्रभाग द्वारा "एमडीएमएस" (माइन डेटा मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल डिजाइन और लॉन्च किया गया है।
  • "एमडीएमएस" (माइन डेटा मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल को पीआर की सभी प्रमुख विशेषताओं तथा चालू परियोजनाओं के डेटा तथा पीआर प्रावधान के अनुपालनानुसार निष्पादन संग्रहण हेतु सीआईएल के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग डिवीजन और सीएमपीडीआई, रांची द्वारा डिजाइन और लॉन्च किया गया है।

चल रही परियोजनाओं और पीआर प्रावधान के प्रदर्शन के पीआर और डेटा की सभी प्रमुख विशेषताओं को संग्रहीत करने के लिए "एमडीएमएस" (माइन डेटा मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल डिजाइन और लॉन्च किया गया है।

  • सीआईएल अधिकारी परिभाषित अंशदायी पेंशन योजना 2007 सभी सीआईएल अधिकारियों को एक ऑनलाइन वेब एप्लिकेशन के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है।

कोविडके विरुद्ध देश की लड़ाई में सीआईएलसबसे आगे

वित्त वर्ष 20-21 के दौरान सीआईएल द्वारा निम्नलिखित कोविड-19 संबंधित सीएसआर परियोजनाएं शुरू की गईं: -

Infrastructure Creation :
S. No. Company Details of infrastructure created Location
1 MCL 525 bedded COVID hospital (500 general & 25 ICU beds). Bed addition is planned. Bhubaneswar, Odisha
2 MCL 150 bedded COVID hospital (144 general & 6 ICU beds) and 50 bedded COVID care centre Lakhanpur, Odisha
3 MCL 6 quarantine centers at HQ and different areas of MCL Odisha
4 BCCL Hospitals earmarked as dedicated COVID hospitals: • Central Hospital, Dhanbad (L – 3 with 30 new ICU beds) • Regional Hospital, Bhuli (L – 2) • Regional Hospitals at Baghmara and Jealgora (L – 1) Dhanbad, Jharkhand
5 SECL Govt. hospitals converted into 100 bedded COVID treatments centre with RT-PCR lab Ambikapur and Bilaspur, Chattisgarh
6 CIL 100 beds of Karnataka Inst. Of Medical Sciences (KIMS) converted into ICU beds Dharwad, Karnataka
Equipment support for COVID-19 treatment :
S. No. Company Details of equipment support provided Location
1 CIL COVID Cold Chain Equipment for Vaccine transport   • West Bengal: 73 Ice Lined Refrigerators (Small), 70 Deep Freezers (Small) & 24 Deep Freezers (Large) •       Meghalaya: 7 Ice Lined Refrigerators (Small), 3 Deep Freezers (Small) & 10 Deep Freezers (Large) •       2 refrigerated trucks (1 each for West Bengal and GMSD, Kolkata) – Procurement is in progress West Bengal, Meghalaya and GMSD, Kolkata
2 SECL COVID Cold Chain Equipment for Vaccine transport • 25 Ice Lined Refrigerators (Small) • 6 Ice Lined Refrigerators (Large) • 13 Deep Freezers (Small) • 1 Deep Freezer (Large) • 1 Walk In Freezer Chattisgarh
3 SECL 60 TRUE-NAT RT-PCR Testing machines Chattisgarh
4 NCL 50 Ambulances Uttar Pradesh

कोविड-19 से संबंधित फंड में योगदान

  • वित्त वर्ष 19-20 में सीआईएल द्वारा पीएम-केयर्स फंड में 221.03 करोड़ रु
  • आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पश्चिम बंगाल को सीआईएल द्वारा 20 करोड़ रु.
  • आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, महारष्ट्र को सीआईएल द्वारा 20 करोड़ रु.
  • आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ को सीआईएल द्वारा 10 करोड़ रु.
  • आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, झारखण्ड को सीआईएल द्वारा 20 करोड़ रु.
  • मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री राहत कोष को एनसीएल द्वारा 20 करोड़ रु.
  • महाराष्ट्र के 3 और मध्य प्रदेश के 2 जिलों में डब्ल्यूसीएल द्वारा 1.25 करोड़ रू

कोविड-19 से संबंधित उपभोग्य सामग्रियों का वितरण

  • श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 71,000 से अधिक भोजन के पैकेट
  • परिधीय क्षेत्रों में लगभग 2.3 लाख तैयार भोजन/सूखे राशन के पैकेट
  • परिधीय क्षेत्रों में 80,000 लीटर से अधिक सैनिटाइजर
  • परिधीय क्षेत्रों में 17.56 लाख से अधिक मास्क
  • परिधीय क्षेत्रों में 1.35 लाख से अधिक हाथ के दस्ताने और 29500 पीपीई

भावी दृष्टिकोण

सीआईएल राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा प्राप्ति में प्रमुख भूमिका निभाने हेतु प्रतिबद्ध है । 'विजन 2024' में वर्णित देश में कोयला क्षेत्र का मांग-प्रक्षेपण एवं तदनुरूप सीआईएल के मांग-प्रक्षेपण के आधार पर एक रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें सीआईएल ने देश में बढ़ते कोयले की मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2023-24 में 1 बिलियन टन (बीटी) उत्पादन की परिकल्पना की है । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, सीआईएल ने प्रमुख परियोजनाओं को चिन्हित किया है तथा इससे संबंधित मुद्दों का आकलन किया है ।