श्री विनय रंजन
निदेशक (मानव संसाधन)
श्री बी. साईराम ने 15 दिसंबर, 2025 को कोल इण्डिया लिमिटेड (सीआईएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के रूप में पदभार संभाला। उन्होंने सीआईएल में शीर्ष पद संभालने से पहले सीआईएल की कोयला उत्पादन अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) का सीएमडी के रूप में नेतृत्व किया।
कोयला खनन क्षेत्र में साढ़े तीन दशकों का अनुभव रखने वाले श्री साईराम ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर से खनन इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। उनका अनुभव कोयला खदानों के संचालन, योजना, लॉजिस्टिक्स और नियामक मामलों तक विस्तारित है। उन्होंने एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस से ऊर्जा प्रबंधन में एमबीए भी किया हैं। सतत ऊर्जा पद्धतियों की बारीकियों को समझने के लिए श्री साईराम ने जर्मनी और पोलैंड में 'जस्ट एनर्जी ट्रांज़िशन' (न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण) पर एक अध्ययन किये है।
एनसीएल के सीएमडी के रूप में, उन्होंने जयंत ओपनकास्ट परियोजना की उत्पादन क्षमता को 30 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 38 मिलियन टन प्रति वर्ष करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई; यह उस समय की बात है जब भूमि की कमी के कारण परियोजना बंद होने के जोखिम से गुजर रही थी। परियोजना वित्तपोषण की व्यवहार्य संरचना तैयार करके और मुआवज़ा तथा आर एंड आर (पुनर्वास और पुनर्स्थापन) का एक ढांचा विकसित करके, उन्होंने शहरी बस्ती को इस तरह से स्थानांतरित करने की योजना बनाई जिसे परियोजना से प्रभावित परिवारों ने सौहार्दपूर्ण ढंग से स्वीकार कर लिया। इसके लिए लगभग 527 हेक्टेयर काश्तकारी भूमि की आवश्यकता थी जिसके लिए मुआवज़ा देना अनिवार्य था; इसे अब तक के सबसे बड़े खनन पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्यक्रमों में से एक माना जाता है।
एनसीएल के 'ब्लॉक बी' का एक ऐसा ही प्रकरण श्री साईराम के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी क्षमता 5.5 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 10 मिलियन टन प्रति वर्ष तक की वृद्धि हो गई। एनसीएल के “ब्लॉक बी” के लिए 45 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता थी, साथ ही विस्तारित क्षेत्र के बाहर 'ओवरबर्डन' को डंप करने के लिए अतिरिक्त 594 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता थी। जब इस परियोजना को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से बाधाओं का सामना करना पड़ा, तो स्थिति को संभालने के लिए श्री साईराम ने एक संशोधित योजना तैयार की जिसमें ओवरबर्डन डंपिंग की आवश्यकता को ही समाप्त कर दिया गया; इस योजना को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा स्वीकार किया गया था।
सेंट्रल कोलफील्ड्स में निदेशक (तकनीकी) के रूप में, वे कोयला लॉजिस्टिक्स के विकास में पूरी तरह से तल्लीन रहे। इसमें देश के भीतरी हिस्सों में स्थित बिजली उपभोक्ताओं तक कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए 'तोरी-शिवपुर लाइन' का तिहरा तक विस्तार करना; 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' परियोजनाओं जिनमें 'नॉर्थ उरीमिरी CHP-Silo' शामिल है को गति देना; वन एवं पर्यावरण संबंधी मंज़ूरियाँ प्राप्त करना; और 'ग्रीनफील्ड' तथा 'ब्राउनफील्ड' खदानों की प्रोजेक्ट योजना तैयार करना शामिल था।
कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने सीआईएल के लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए कहा, "कोयले का उत्पादन बढ़ाना और बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले की आपूर्ति करना, देश की ऊर्जा मांग को पूरा करने के हमारे मुख्य कार्यक्षेत्र बने रहेंगे। लेकिन बदलते कारोबारी माहौल और ऊर्जा क्षेत्र की गतिशीलता के अनुरूप, हम सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों के अधिग्रहण और कोयला गैसीकरण के क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से कदम बढ़ा रहे हैं। कंपनी सतत खनन पद्धतियों के प्रति भी प्रतिबद्ध है।"
श्री. साईराम का दशकों का कोयला खनन अनुभव और कठिन कार्यों से निपटने का उनका दृढ़ संकल्प, सीआईएल में उनके नेतृत्व को एक विशेष बढ़त और मजबूती प्रदान करता है।
श्री बी. साईराम ने 15 दिसंबर, 2025 को कोल इण्डिया लिमिटेड (सीआईएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के रूप में पदभार संभाला। उन्होंने सीआईएल में शीर्ष पद संभालने से पहले सीआईएल की कोयला उत्पादन अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) का सीएमडी के रूप में नेतृत्व किया।
कोयला खनन क्षेत्र में साढ़े तीन दशकों का अनुभव रखने वाले श्री साईराम ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर से खनन इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। उनका अनुभव कोयला खदानों के संचालन, योजना, लॉजिस्टिक्स और नियामक मामलों तक विस्तारित है। उन्होंने एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस से ऊर्जा प्रबंधन में एमबीए भी किया हैं। सतत ऊर्जा पद्धतियों की बारीकियों को समझने के लिए श्री साईराम ने जर्मनी और पोलैंड में 'जस्ट एनर्जी ट्रांज़िशन' (न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण) पर एक अध्ययन किये है।
एनसीएल के सीएमडी के रूप में, उन्होंने जयंत ओपनकास्ट परियोजना की उत्पादन क्षमता को 30 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 38 मिलियन टन प्रति वर्ष करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई; यह उस समय की बात है जब भूमि की कमी के कारण परियोजना बंद होने के जोखिम से गुजर रही थी। परियोजना वित्तपोषण की व्यवहार्य संरचना तैयार करके और मुआवज़ा तथा आर एंड आर (पुनर्वास और पुनर्स्थापन) का एक ढांचा विकसित करके, उन्होंने शहरी बस्ती को इस तरह से स्थानांतरित करने की योजना बनाई जिसे परियोजना से प्रभावित परिवारों ने सौहार्दपूर्ण ढंग से स्वीकार कर लिया। इसके लिए लगभग 527 हेक्टेयर काश्तकारी भूमि की आवश्यकता थी जिसके लिए मुआवज़ा देना अनिवार्य था; इसे अब तक के सबसे बड़े खनन पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्यक्रमों में से एक माना जाता है।
एनसीएल के 'ब्लॉक बी' का एक ऐसा ही प्रकरण श्री साईराम के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी क्षमता 5.5 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 10 मिलियन टन प्रति वर्ष तक की वृद्धि हो गई। एनसीएल के “ब्लॉक बी” के लिए 45 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता थी, साथ ही विस्तारित क्षेत्र के बाहर 'ओवरबर्डन' को डंप करने के लिए अतिरिक्त 594 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता थी। जब इस परियोजना को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से बाधाओं का सामना करना पड़ा, तो स्थिति को संभालने के लिए श्री साईराम ने एक संशोधित योजना तैयार की जिसमें ओवरबर्डन डंपिंग की आवश्यकता को ही समाप्त कर दिया गया; इस योजना को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा स्वीकार किया गया था।
सेंट्रल कोलफील्ड्स में निदेशक (तकनीकी) के रूप में, वे कोयला लॉजिस्टिक्स के विकास में पूरी तरह से तल्लीन रहे। इसमें देश के भीतरी हिस्सों में स्थित बिजली उपभोक्ताओं तक कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए 'तोरी-शिवपुर लाइन' का तिहरा तक विस्तार करना; 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' परियोजनाओं जिनमें 'नॉर्थ उरीमिरी CHP-Silo' शामिल है को गति देना; वन एवं पर्यावरण संबंधी मंज़ूरियाँ प्राप्त करना; और 'ग्रीनफील्ड' तथा 'ब्राउनफील्ड' खदानों की प्रोजेक्ट योजना तैयार करना शामिल था।
कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने सीआईएल के लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए कहा, "कोयले का उत्पादन बढ़ाना और बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले की आपूर्ति करना, देश की ऊर्जा मांग को पूरा करने के हमारे मुख्य कार्यक्षेत्र बने रहेंगे। लेकिन बदलते कारोबारी माहौल और ऊर्जा क्षेत्र की गतिशीलता के अनुरूप, हम सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों के अधिग्रहण और कोयला गैसीकरण के क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से कदम बढ़ा रहे हैं। कंपनी सतत खनन पद्धतियों के प्रति भी प्रतिबद्ध है।"
श्री. साईराम का दशकों का कोयला खनन अनुभव और कठिन कार्यों से निपटने का उनका दृढ़ संकल्प, सीआईएल में उनके नेतृत्व को एक विशेष बढ़त और मजबूती प्रदान करता है।
निदेशक (मानव संसाधन)
श्री विनय रंजन ने 28 जुलाई, 2021 से निदेशक (कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध), कोल इंडिया लिमिटेड के रूप में कार्यभार संभाला। श्री रंजन एक प्रदर्शन केंद्रित जनमुखी पेशेवर हैं, जिनको मानव संसाधन के संपूर्ण क्षेत्र जिसमें वृह्द स्तर पर लेटेरल/कैंपस हायरिंग, प्रतिभा प्रबंधन, प्रदर्शन प्रबंधन, नियोक्ता ब्रांडिंग, मुआवजा प्रबंधन एवं बेंच-मार्किंग, परिवर्तन प्रबंधन, सांस्कृतिक निर्माण, कार्मिक संलग्नता, कार्मिक संबंध, एचआरआईएस, कार्मिक उत्पादकता तथा अधिगम एवं विकास में व्यापक वर्षों का अनुभव प्राप्त है । उन्होंने विदेशी व्यापारिक संस्थाओं को भी सफलतापूर्वक मानव संसाधन सहायता प्रदान किए है। वे दो एसएपी एचआर कार्यान्वयन के संपूर्ण प्रक्रिया में भागीदार थे। उन्होंने टाटा कम्युनिकेशन (पूर्ववर्ती वीएसएनएल) में एसएपी एचआर कार्यान्वयन के संपूर्ण प्रक्रिया में टीम का नेतृत्व किया, जिसमें उन्होंने संपूर्ण एसएपी एचसीएम मॉड्यूल के कार्यान्वयन हेतु वीएसएनएल एचआर और टीसीएस से गठित 8 सदस्यीय टीम का नेतृत्व किया। वह वीएसएनएल से प्रतिनियुक्ति पर टाटा टेलीसर्विसेज (टीटीएसएल) एसएपी एचआर कार्यान्वयन टीम का भी हिस्सा थे ।
कुशल एवं उच्च उत्पादक श्रमबल को विकसित करने और उसका नेतृत्व करने की क्षमता के साथ वे एक प्रभावशाली मार्गदर्शक हैं। उनमें हितधारक प्रबंधन के उत्कृष्ट कौशल हैं तथा वे विगत 5 वर्षो से प्रमोटरों के साथ सीधे काम कर रहे हैं। वे सेवा प्रदाता एवं निष्पादन के उच्च स्तरीय चेतना के साथ अपनी अखंडता और प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। उनमें सशक्त पारस्परिक संचार और समझौता वार्त्ता का कौशल भी हैं। 29 जुलाई, 2016 को फॉनटेनब्लियू परिसर, फ्रांस में आयोजित भव्य स्नातक समारोह में पाठ्यक्रम के सफल समापन पर वे आईएनएसईएडी (INSEAD) के भूतपूर्व छात्र बने।
जब दैनिक भास्कर समूह का विभाजन हुआ और 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ दो बड़े ताप विद्युत संयंत्र बनाने का निर्णय लिया गया, तब श्री विनय रंजन डीबी पावर लिमिटेड (दैनिक भास्कर समूह की कंपनी) के एचआर - कॉर्पोरेट प्रमुख थे।
निदेशक (विपणन)
श्री मुकेश चौधरी ने 23 दिसंबर, 2022 (अपराह्न) से सरकारी स्वामित्व वाली महारत्न कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के निदेशक (विपणन) के रूप में पदभार ग्रहण किया। सीआईएल विपणन प्रभाग के शीर्ष स्थान की कमान संभालने से पूर्व, वे विभाग, रक्षा मंत्रालय में रक्षा उत्पादन विभाग के उप महानिदेशक थे। भारतीय आयुध निर्माणी सेवा (आईओएफएस) 1996 बैच के एक अधिकारी, श्री चौधरी अभियंत्रिकी महाविद्यालय, कोटा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ऑनर्स) स्नातक हैं। उनके पास मास्टर ऑफ फाइनेंशियल एनालिसिस (एमएफए) और एमबीए की उपाधि भी है। सीआईएल के लिए महत्वपूर्ण रूप से, श्री चौधरी देश की कोयला मांग आपूर्ति श्रृंखला की सूक्ष्मतर बारीकियों और कोयला मंत्रालय में निदेशक (कोयला उत्पादन और प्रेषण) के रूप में जहां उनके कार्यों में कोयले की आपूर्ति, परिवहन रसद और विपणन नीतियों की निगरानी करना शामिल था, अपने साढ़े छह साल के अनुभव के आधार पर सीआईएल के विपणन प्रणाली से भली-भाँति अभिज्ञ हैं। उन्होंने सरकारी स्वामित्व वाली तीन कोयला कंपनियों - एमसीएल, एसईसीएल, एनएलटीपीएल, एनसीएल, एससीसीएल और सीएमडीपीआई के बोर्डों में भी काम किया। ऐसे समय में जब विशेष रूप से प्रमुख कोयला खपत करने वाले बिजली क्षेत्र के लिए, सीआईएल की कोयला आपूर्ति कीर्तिमान उच्च स्तर पर पहुंच गई है, और देश में बिजली उत्पादन में वृद्धि के कारण जहाँ कोयले की मांग बढ़ने की उम्मीद है, श्री चौधरी का अनुभव चुनौतीपूर्ण विषयों से निपटने में सहायक होगा।
निदेशक (वित्त)
श्री मुकेश अग्रवाल इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक हैं तथा इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के सदस्य हैं। कोल इंडिया लिमिटेड में निदेशक (वित्त) के रूप में सेवा देने से पूर्व इन्होंने एनएलसी इंडिया लिमिटेड, एक नवरत्न कंपनी में कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी सेवा प्रदान की है। आईटीआई लिमिटेड, इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड, एनएलसी इंडिया लिमिटेड आदि जैसे निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में तीन दशकों से अधिक समय के प्रभावशाली ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, एक अनुभवी पेशेवर के रुप में इनका बुनियादी ढांचा क्षेत्र के गतिशील परिदृश्य में योग्यता सहित व्यापक अनुभव है। इनकी विशेषज्ञता में रबर, कताई, दूरसंचार, निर्माण, बिजली, लिग्नाइट और कोयला सहित उद्योगों की एक विविध श्रृंखला शामिल है। वित्त क्षेत्र में, उन्होंने अकाउंट्स, ट्रेजरी, कराधान, लागत, बजटिंग, इन्वेंटरी प्रबंधन, देयता तथा फंड प्रबंधन, डिजिटलीकरण, नीति निर्माण, प्रणाली सुधार, आईएफसी इत्यादि जैसे कई आयामों में दक्षता प्रदर्शित की है। विशेष रूप से, उन्होंने एनएलसी इंडिया लिमिटेड की एक प्रमुख अनुषंगी कंपनी एनयूपीपीएल में मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) के प्रतिष्ठित पद को संभाला है। उन्होंने लिग्नाइट, बिजली मूल्य निर्धारण और नियामक मामलों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वित्तीय मामलों में उनके वृहद ज्ञान और नेतृत्व ने निरंतर विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे क्षेत्र में संगठनों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
निदेशक (तकनीकी)
श्री अच्युत घटक, निदेशक (तकनीकी) ने 1989 में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक, रायपुर से खनन इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की और 1993 में प्रथम श्रेणी खान प्रबंधक योग्यता प्रमाणपत्र प्राप्त किया। उन्होंने 1989 में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में जूनियर एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के रूप में अपना करियर शुरू किया, जो कि CIL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और वहां 19 साल तक काम किया, जिसमें से अधिकांश मशीनीकृत भूमिगत खदानों में काम किया। अगस्त, 2008 के बाद, उन्होंने CIL मुख्यालय कोलकाता में परियोजना निगरानी और कॉर्पोरेट योजना के महत्वपूर्ण विभागों में काम किया।
श्री घटक ने निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
1) कोयला खनन परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए CIL में पहली बार MS-प्रोजेक्ट का उपयोग
2) CIL की 1 बीटी योजना के लिए रोडमैप तैयार करना
3) CIL की भूमिगत विजन योजना तैयार करना और उसे लागू करना
4) CIL के विजन 2047 का निर्माण और कोयला मंत्रालय के विजन 2047 दस्तावेज़ की तैयारी में सहायता करना।
5) सीएमपीडीआईएल में नए आरएंडडी सेंटर, नैकर फेज I को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
6) 2047 में सीएमपीडीआईएल के निर्माण में प्रमुख व्यक्ति
अपनी आधिकारिक क्षमता में, उन्होंने विभिन्न देशों का दौरा किया है और भूमिगत खनन और परिचालन योजना में व्यापक अनुभव है, जिससे सीआईएल को बहुत लाभ होगा। निदेशक (तकनीकी) के रूप में सीआईएल में शामिल होने से पहले, श्री घटक 01.10.2023 से सीआईएल की खनन परामर्श सहायक कंपनी सीएमपीडीआई में निदेशक (आरडीएंडटी) के रूप में काम कर रहे थे।
निदेशक (व्यावसायिक विकास)
श्री आशीष कुमार ने 21.08.2025 से निदेशक (व्यवसाय विकास) का कार्यभार संभाला। उन्होंने वर्ष 1993 में आईएसएम, धनबाद से बी.टेक पूरा किया और वर्ष 2000 में डीजीएमएस द्वारा प्रथम श्रेणी प्रबंधक योग्यता प्रमाणपत्र प्राप्त किया। श्री आशीष कुमार बीआईटी, मेसरा से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर भी हैं और उनके पास भारतीय सामग्री प्रबंधन संस्थान से अनुबंध प्रबंधन में डिप्लोमा भी है। वह 1994 में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में ग्रेजुएट इंजीनियरिंग ट्रेनी (खनन) के रूप में कोल इंडिया लिमिटेड में शामिल हुए। श्री कुमार के पास परिचालन, अनुबंध प्रबंधन, सतर्कता, नीति निर्माण, योजना और परियोजना निगरानी जैसे विभिन्न डोमेन से जुड़े 30 से अधिक वर्षों का व्यापक खनन अनुभव है। कोयला मंत्रालय में ओएसडी/परियोजना सलाहकार की भूमिका में जाने से पहले, श्री आशीष कुमार ने सीआईएल के महत्वपूर्ण खनिजों में विविधीकरण का नेतृत्व किया। कोयला मंत्रालय के परियोजना सलाहकार के रूप में, कोयला क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाने के लिए नीतिगत सुधारों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अतिरिक्त सचिव कोयला मंत्रालय
सुश्री रूपिंदर बरार भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की 1990 बैच की अधिकारी हैं। उन्होंने ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, नेशनल यूनिवर्सिटी सिंगापुर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है और हिंदू कॉलेज, दिल्ली की पूर्व छात्रा हैं। सुश्री बरार ने मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री भी प्राप्त की है। कोयला मंत्रालय (एमओसी) में नियुक्ति से पहले, उन्होंने मुंबई और दिल्ली में मुख्य आयकर आयुक्त के रूप में कार्य किया है। आयकर आयुक्त के रूप में उन्होंने मुंबई में कार्य किया है और सीमा पार कराधान सहित बड़े कॉर्पोरेट कर आकलन के मामलों को संभाला है। वह ट्रांसफर प्राइसिंग और अंतर्राष्ट्रीय कर संबंधी मुद्दों को देखने वाले विवाद समाधान पैनल की सदस्य रही हैं। उन्होंने जुलाई 2019 से जून 2022 तक पर्यटन मंत्रालय में एडीजी पर्यटन के रूप में भी काम किया है और अक्टूबर 2019 से जून 2022 तक भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (आईटीडीसी) और इसकी सहायक कंपनी दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम लिमिटेड के बोर्ड में नामित सरकारी निदेशक थीं। वर्तमान में वह कोयला ब्लॉक की नीलामी को संभालने वाली कोयला मंत्रालय की नामित प्राधिकारी भी हैं। वह सीआईएल की सहायक कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में सरकार के नामित निदेशक के रूप में निदेशक का पद संभालती हैं।
संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, एमओसी
श्री आशिम कुमार मोदी, भारतीय राजस्व सेवा (आईटी) (2000 बैच) के अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत सरकार के कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। वे कोल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एसईसीएल के बोर्ड में अंशकालिक अधिकारी/सरकारी नामित निदेशक के रूप में भी कार्यरत हैं। श्री मोदी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक. की उपाधि प्राप्त की है। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार के पद पर कार्यभार ग्रहण करने से पहले, उन्होंने आयकर विभाग में कोलकाता, मुंबई और दिल्ली में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
श्री सत्यब्रत पंडा [DIN- 02736534] को 30.04.2025 से स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। श्री पंडा ने उत्कल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. किया है। वे पेशे से पत्रकार हैं और ओडिया भाषा में आर्थिक त्रैमासिक पत्रिका "भूमि" के संपादक हैं। श्री पंडा आईआईटी भुवनेश्वर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी हैं।
मुख्य सतर्कता अधिकारी, सीआईएल
श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, आईआरएसई, (1996 परीक्षा बैच) ने 16 नवंबर, 2022 को कोल इंडिया लिमिटेड, कोलकाता के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने एमएनआरईसी, इलाहाबाद से अभियांत्रिकी (असैनिक) में स्नातक और आईआईटी, दिल्ली से प्रौद्योगिकी में स्नातकोत्तर किया। सीआईएल से जुड़ने से पहले उन्होंने पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल के अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक (एडीआरएम) के प्रशासनिक पद पर कार्य किया। इससे पहले, पूर्व रेलवे में मुख्य सतर्कता अधिकारी (अभियांत्रिकी) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने कई सतर्कता सुधारों और प्रणाली सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्री त्रिपाठी को विभिन्न रेलवे परियोजनाओं के योजना बनाने, प्रारूरण और निष्पादन के साथ-साथ प्रमुख आधारभूत ढांचे के अनुरक्षण और संचालन में लगभग 25 वर्षों का व्यापक अनुभव है। उन्हें स्थापना, आय-व्ययक, निविदाओं और अनुबंध प्रबंधन आदि से संबंधित विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त है। उनके पास कोल इंडिया लिमिटेड का कोई शेयर नहीं है।