कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), भारत सरकार के स्वामित्व वाली कोयला खनन कंपनी, नवंबर 1975 में अस्तित्व में आई। स्थापना वर्ष में 79 मिलियन टन (एमटी) के मामूली उत्पादन से शुरुआत करने वाली कोल इंडिया आज विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी तथा सबसे बड़े कॉर्पोरेट नियोक्ताओं में से एक बन चुकी है। दिनांक 1 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार कंपनी में कुल 2,12,066 कर्मचारी कार्यरत हैं।
आठ भारतीय राज्यों में विस्तृत सीआईएल 85 खनन क्षेत्रों में कार्यरत है तथा 295 चालू खदानों का संचालन करती है, जिनमें 121 भूमिगत खदानें, 163 खुली खदानें (ओपनकास्ट) तथा 11 मिश्रित खदानें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कंपनी कार्यशालाओं, अस्पतालों तथा अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों का भी संचालन करती है।
सीआईएल के अंतर्गत 21 प्रशिक्षण संस्थान तथा 68 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (आईआईसीएम) एक अत्याधुनिक प्रबंधन प्रशिक्षण “उत्कृष्टता केंद्र” (Centre of Excellence) के रूप में कार्यरत है, जो भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण संस्थान है। यह सीआईएल के अधीन संचालित होता है तथा बहु-विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
सीआईएल एक महारत्न कंपनी है। यह भारत सरकार द्वारा चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों को प्रदान किया जाने वाला विशेष दर्जा है, जिसका उद्देश्य उन्हें अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने तथा वैश्विक स्तर पर अग्रणी कंपनी के रूप में विकसित होने के लिए सशक्त बनाना है। देश के 300 से अधिक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में से केवल 14 कंपनियों को ही यह प्रतिष्ठित दर्जा प्राप्त है।
सीआईएल की तेरह अनुषंगी कंपनियाँ हैं, जिनके नाम हैं: ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डबल्यूसीएल), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल), सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल), सीआईएल नवीकरणीय ऊर्जा लिमिटेड (गैर-पारंपरिक/स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए), भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (भारत में 'कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट' परियोजना के विकास के लिए), कोल गैस इंडिया लिमिटेड (कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए) और सीआईएल राजस्थान अक्षय ऊर्जा लिमिटेड (नवीकरणीय व्यवसाय के लिए)। सीआईएल की मोजाम्बिक में एक विदेशी अनुषंगी कंपनी भी है, जिसका नाम कोल इंडिया अफ्रीकाना लिमिटाडा (सीआईएएल) है; यह विदेशी कोयला परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, अन्वेषण और विकास के लिए कार्य करती है ।
इसके अतिरिक्त, सीआईएल की छह संयुक्त उद्यम कंपनियां हैं- हिंदुस्तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड, तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, सीआईएल एनटीपीसी ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड, कोल लिग्नाइट ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड, इंटरनेशनल कोल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड और डीवीसी सीआईएल पावर प्राइवेट लिमिटेड।
असम में स्थित खदानें यानी नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एनईसी) का प्रबंधन सीधे सीआईएल द्वारा किया जाता है।
अतुलनीय रणनीतिक महत्व
सीआईएल देश के कुल विद्युत उत्पादन में लगभग 55% योगदान देती है तथा भारत की प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 40% पूरा करती है। यह देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन का 75% तथा कोयला आधारित कुल विद्युत उत्पादन का भी 75% योगदान करती है।
सीआईएल की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के अंतर्गत स्थित गेवरा़ खदान एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है।
सीआईएल "मेक इन इंडिया" अभियान को सशक्त बनाने तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उत्पादन और वृद्धि :
सीआईएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में 768.19 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन तथा 1979.96 मिलियन घन मीटर (एमसीयूएम) ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) का आंकड़ा प्राप्त किया।
इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कच्चे कोयले का ऑफटेक 744.8 मिलियन टन (एमटी) रहा तथा इस अवधि में प्रतिदिन औसतन 307.1 रेक की लोडिंग की गई।
परियोजनाएँ:
कोल इण्डिया लिमिटेड के अंतर्गत 124 कोयला परियोजनाएँ विभिन्न है जो विभिन्न चरणों में कार्यान्वयनाधीन हैं, जिनकी स्वीकृत क्षमता 1044.79 मिलियन टन (एमटी) तथा स्वीकृत पूंजी निवेश ₹1,69,452.25 करोड़ है। इन परियोजनाओं ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 547.5 मिलियन टन कोयला उत्पादन में योगदान दिया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सीआईएल तथा उसकी सहायक कंपनियों के निदेशक मंडलों द्वारा 13 खनन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनकी कुल स्वीकृत क्षमता 76.72 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीवाई) तथा स्वीकृत पूंजी निवेश ₹13,601.18 करोड़ है। इन परियोजनाओं से सीआईएल के कोयला उत्पादन में और वृद्धि होने की अपेक्षा है।
उपभोक्ता संतुष्टि:
सीआईएल के लिए उपभोक्ता संतुष्टि एक प्राथमिकता का क्षेत्र है। उपभोक्ताओं की संतुष्टि बढ़ाने हेतु खदान से प्रेषण स्थल तक कोयले की गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया है।
सीआईएल के सभी उपभोक्ताओं को स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सैंपलिंग एजेंसियों के माध्यम से गुणवत्ता मूल्यांकन का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में किए गए सतत एवं सुनियोजित प्रयासों के परिणामस्वरूप घोषित तथा विश्लेषित जीसीवी (Gross Calorific Value) के भारित औसत के बीच का अंतर एक जीसीवी बैंड के भीतर ही बना हुआ है।
जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन को स्पर्श करना :
विश्व के अन्य भागों की तुलना में भारत में अधिकांश कोयला भंडार वन क्षेत्रों अथवा जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित हैं। परिणामस्वरूप, कोयला खनन के कारण लोगों का विस्थापन अवश्यंभावी हो जाता है। इस चुनौती से संवेदनशीलता के साथ निपटने हेतु सीआईएल ने परियोजना प्रभावित लोगों के लिए सुव्यवस्थित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (Rehabilitation and Resettlement) नीति अपनाई है। कंपनी “मानवीय दृष्टिकोण के साथ खनन” (Mining with a Human Face) की अवधारणा पर कार्य करते हुए सामाजिक रूप से सतत एवं समावेशी विकास मॉडल को आगे बढ़ाती है तथा आजीविका संबंधी निर्णय प्रक्रिया में परियोजना प्रभावित लोगों को सहभागी बनाती है।
उत्तरदायी कॉर्पोरेट नागरिक
सीआईएल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पर सर्वाधिक व्यय करने वाली कंपनियों में से एक है।
कंपनी द्वारा संचालित सीएसआर गतिविधियों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, खेलकूद तथा अन्य सामाजिक कल्याण संबंधी कार्यक्रम शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सीआईएल एवं उसकी सहायक कंपनियों ने सीएसआर गतिविधियों पर ₹988.78 करोड़ व्यय किए।
कॉर्पोरेट नागरिक:
सीआईएल सार्वजनिक उपक्रमों में सबसे अधिक सीएसआर खर्च करने वाली कंपनियों में से एक है। कंपनी द्वारा की जाने वाली सीएसआर गतिविधियों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, खेल आदि शामिल हैं। सीआईएल और उसकी अनुषंगी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सीएसआर गतिविधियों पर 988.78 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
कोयला परिशोधन
कोल इंडिया अपने कोयला परिशोधन (Beneficiation) अवसंरचना को सुदृढ़ बना रही है। वर्तमान में कंपनी 13 वाशरियों का संचालन कर रही है तथा 14 अतिरिक्त वाशरियाँ विकासाधीन हैं। इनमें से 10 वाशरियों की परिचालन क्षमता कोकिंग कोयले के लिए 19 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीवाई) तथा नॉन-कोकिंग कोयले के लिए 21 एमटीवाई से अधिक है।
इसके अतिरिक्त, 77+ एमटी की अतिरिक्त क्षमता भी पाइपलाइन में है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2029-30 तक 19 एमटीवाई परिचालन क्षमता वाली 7 कोकिंग कोयला वाशरियाँ तथा वित्तीय वर्ष 2031-32 तक 58 एमटीवाई परिचालन क्षमता वाली 7 नॉन-कोकिंग कोयला वाशरियाँ शामिल हैं।
पर्यावरण संवर्धन / पर्यावरण प्रबंधन:
कोयला खनन सामान्यतः प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण से जुड़ा होता है तथा इससे उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियाँ सर्वविदित हैं। कोल इंडिया एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट संस्था के रूप में खनन के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाती है तथा सतत कोयला खनन पद्धतियों का अनुसरण करती है। पर्यावरणीय प्रभावों को न्यूनतम करने एवं उनके शमन हेतु एक वैचारिक रूपरेखा लागू की गई है तथा पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर समन्वित प्रयास किए जाते हैं।
सीआईएल पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने तथा व्यवहार्य कोयला खनन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर दोहराती है। कंपनी द्वारा प्रत्येक वर्ष ओबी डंप, हॉल रोड, खदानों के आसपास, आवासीय कॉलोनियों तथा उपलब्ध भूमि पर व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सीआईएल ने खदान पट्टा क्षेत्र के भीतर एवं बाहर 51.80 हेक्टेयर में मियावाकी वृक्षारोपण सहित कुल 2403.78 हेक्टेयर क्षेत्र में 52.92 लाख पौधे लगाए हैं।
खनन क्षेत्रों में संरक्षण को बढ़ावा देने तथा स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कंपनी ने पुनर्वास कार्यों के अंतर्गत इको-पार्कों का भी विकास किया है। सीआईएल ने खनन समाप्त हो चुकी भूमि पर पर्यटन सुविधाओं सहित 39 मनोरंजन पार्क/इको-पार्क विकसित किए हैं। इसके अतिरिक्त, सीआईएल की खदानों से निकाले गए खदान जल से वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन क्षेत्रों के आसपास स्थित 971 गाँवों के 16.20 लाख लोगों को लाभ प्राप्त हुआ।
सीआईएल मुख्यालय को 2025 में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए क्रमशः ISO 9001:2015, ISO 14001:2015 और ISO 50001:2018 का पुनः प्रमाणन प्राप्त हुआ, जिसकी वैधता अक्टूबर 2028 तक है। 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, ईसीएल और एमसीएल को एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (ISO 9001:2015, ISO 14001:2015 और ISO 45001:2018) से प्रमाणित किया गया है। एनसीएल को, ISO/IEC 27001 – सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का प्रमाणन प्राप्त है। सीएमपीडीआई मुख्यालय और इसके सात आरआई , ISO 9001:2015 से प्रमाणित हैं। इसके अलावा, सीएमपीडीआईएल मुख्यालय, रांची को ISO 37001:2016 (भ्रष्टाचार-रोधी प्रबंधन प्रणाली) का भी प्रमाणन प्राप्त है।
ऊर्जा संरक्षण
सीआईएल के लिए ऊर्जा संरक्षण एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और विशिष्ट ऊर्जा खपत में कमी लाने की दिशा में विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। खदान प्रकाश व्यवस्था, भूमिगत खदानों की रोशनी, सड़क प्रकाश व्यवस्था, कार्यालयों, कार्यस्थलों एवं टाउनशिप आदि में अधिकांश स्थानों पर उच्च वॉट क्षमता वाले पारंपरिक प्रकाश उपकरणों को उपयुक्त क्षमता वाले कम ऊर्जा खपत करने वाले एलईडी प्रकाश उपकरणों से प्रतिस्थापित किया गया है, जिससे विद्युत खपत में उल्लेखनीय बचत हुई है।
सीआईएल की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों में अत्यधिक ऊर्जा-कुशल 'सुपर फ़ैन' लगाए गए हैं। सीआईएल की अनुषंगी कंपनियों में विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा-कुशल वॉटर हीटर लगाए गए हैं और सड़कों पर लगी लाइटों में 'ऑटो टाइमर' भी लगाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सहायक कंपनियों के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयुक्त केवीएआर (KVAR) क्षमता वाले कैपेसिटर बैंक स्थापित कर 0.90 से 0.99 के बीच पावर फैक्टर बनाए रखा गया।
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु भी विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इसके अंतर्गत किलोवाट स्तर के रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा की ओर अग्रसर : परिचालन का डीकार्बोनाइजेशन
सौर ऊर्जा उत्पादन
सीआईएल ने अपनी विभिन्न सहायक कंपनियों के माध्यम से 257 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की है तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 255.45 मिलियन यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन किया। उत्पादित समस्त ऊर्जा का उपयोग आंतरिक उपभोग के लिए किया गया।
कोल इंडिया ने गुजरात के पाटन में 100 मेगावाट क्षमता वाले ग्रिड-संबद्ध सौर ऊर्जा संयंत्र की सफल स्थापना के माध्यम से अपने नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो को और सुदृढ़ किया है। इस संयंत्र से उत्पादित विद्युत का उपयोग अब Gujarat Energy Transmission Corporation (GETCO) नेटवर्क के माध्यम से Gujarat Urja Vikas Nigam Limited (GUVNL) द्वारा किया जा रहा है।
सीआईएल ने नेट ज़ीरो नवीकरणीय ऊर्जा योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2027-28 तक 3 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है तथा आगे इसे बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट तक पहुँचाने की योजना बनाई है।
कार्बन न्यूट्रैलिटी की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर
ऊर्जा दक्षता संबंधी उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 181.92 मिलियन यूनिट विद्युत ऊर्जा की बचत हुई, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 1,49,178 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आई।
इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 255.45 मिलियन यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 2,04,360 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई।
विविधीकरण रणनीति : रसायन एवं उर्वरक क्षेत्र तथा नए व्यावसायिक क्षेत्र
कोल इंडिया एक सुदृढ़ एवं अत्यधिक विविधीकृत व्यावसायिक मॉडल विकसित करने तथा तीव्र विकास के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु रणनीतिक विविधीकरण रोडमैप पर कार्य कर रही है।
इसके अंतर्गत कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार करते हुए कोयला आधारित तापीय एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं, सौर एवं पवन ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals), सतही एवं भूमिगत कोयला गैसीकरण आदि क्षेत्रों में कार्य कर रही है। नवीकरणीय ऊर्जा के साथ एकीकरण एक स्थायी ऊर्जा भविष्य प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । कंपनी की दीर्घकालिक दृष्टि आगामी दशकों में नए व्यावसायिक क्षेत्रों में विविधीकरण को प्राथमिकता देती है, ताकि ऊर्जा बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढाला जा सके तथा कोयले के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देकर कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाई जा सके। इसके लिए मौजूदा अवसंरचना का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन हेतु किया जा रहा है, जिससे सीआईएल को एक सतत ऊर्जा समूह (Sustainable Energy Conglomerate) के रूप में विकसित किया जा सके।
कोयला गैसीकरण व्यवसाय का विस्तार
कोल इण्डिया की विविधीकरण रणनीति में कोयला गैसीकरण एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है। इस पहल से देश की आयातित रसायनों एवं प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम होने की संभावना है।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ :
भारत कोल गैसिफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) - सीआईएल और बीएचईएल के बीच एक संयुक्त उद्यम (जेवी) हैं, जिसका गठन ओडिशा में एक परियोजना के विकास के लिए किया गया है। कोल गैस इंडिया लिमिटेड (सीजीआईएल) - सीआईएल और जीएआईएल (गेल) के बीच गठित एक संयुक्त उद्यम हैं, जिसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल में एक परियोजना को कार्यान्वित करना है। महाराष्ट्र में एक परियोजना के विकास के लिए सीआईएल और बीपीसीएल के बीच एक संयुक्त उद्यम को भी मंज़ूरी दी गई है।
सीआईएल की सुरक्षा नीति
सीआईएल के संचालन कार्यों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाती है, जिसका स्पष्ट उल्लेख कंपनी के मिशन वक्तव्य में भी किया गया है। खदानों में सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सीआईएल ने एक सुव्यवस्थित एवं स्पष्ट सुरक्षा नीति अपनाई है।
फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी
कोल इंडिया ने अपनी फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं के तहत कोयला परिवहन और लोडिंग प्रणालियों के मशीनीकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। वित्त वर्ष 2025-26 तक 46 परियोजनाओं के माध्यम से एफएमसी परियोजनाओं की क्षमता 432 मीट्रिक टन प्रति वर्ष थी, जिसे वित्त वर्ष 2028-29 तक 92 परियोजनाओं के माध्यम से 994 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में : सीआईएल का 1 बिलियन टन उत्पादन लक्ष्य
सीआईएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 768.19 मिलियन टन के उत्पादन स्तर से आगे बढ़ते हुए वित्तीय वर्ष 2029-30 तक कोयला उत्पादन को 1 बिलियन टन (BT) तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य कोयला आयात पर निर्भरता कम करना तथा घरेलू मांग की पूर्ति सुनिश्चित करना है।
इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सभी प्रमुख परियोजनाओं एवं आवश्यक सहायक कारकों—जैसे पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियाँ, भूमि उपलब्धता तथा निकासी अवसंरचना—की पहचान कर ली गई है। सभी हितधारकों के सक्रिय सहयोग से सीआईएल इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हालाँकि, वास्तविक उत्पादन और आपूर्ति, मौजूदा माँग की स्थिति के अनुरूप ही बनी रहेगी।