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श्री आर. पी. श्रीवास्तव, निदेशक (कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध), सीआईएल का संक्षिप्त परिचय


श्री आर. पी. श्रीवास्तव

श्री आर.पी. श्रीवास्तव ने 31.01.2018 कोकोल इंडिया लिमिटेड के निदेशक (कार्मिक और औद्योगिक संबंध) का प्रभार ग्रहण किये। इससे पूर्व वे राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, विशाखापत्तनम के कार्मिक निदेशालय में कार्यकारी निदेशक (कॉर्पोरेट सेवा) के पद पर कार्यरत थे । वे भारत के एक प्रसिद्ध संस्थान, एमडीआई गुड़गांव से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किए हैं ।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतिस्पर्धा परीक्षा में चयनित होने के पश्चात, श्री आर.पी श्रीवास्तव ने 34 साल पहले विशाखापट्टनम स्टील प्लांट, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में प्रबंधन प्रशिक्षु (प्रशासन) के रूप में मानव संसाधन के क्षेत्र में अपना व्यावसायिक कार्यकाल शुरू किया था।

आरआईएनएल के कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षमताओं में, उन्हें विभिन्न एचआर पहल के कार्यान्वयन का श्रेय मिला । संगठन के मानव संसाधन प्रबंधन कार्य में प्रणालीगत प्रशासन हेतु संगठनात्मक आवश्यकता एवं कर्मचारियों की अपेक्षाओं को देखते हुए उन्होंने विभिन्न नीतियों, दिशानिर्देशों और प्रक्रियाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन के हित को कायम रखते हुएकार्मिक नीतियों को तैयार करके एवं अद्यतन करके विकास के अवसरों का सृजन करने के माध्यम से,श्री श्रीवास्तव ने आरआईएनएल के कर्मचारियों के विकास के लिए एक सुविधापूर्ण वातावरण तैयार करने का निरंतर प्रयास किये हैं ।

उन्होंने लर्निंग एंड डेवलपमेंट में विशेषज्ञता प्राप्त की है और आरआईएनएल / वीएसपी में नॉलेज मैनेजमेंट एंड टीक्यूएम की अवधारणा का प्रवर्तन किए है। उन्होंने एचआर प्लानिंग, भर्ती और चयन, कर्मचारियों काप्रशिक्षण और विकास, राजभाषा का कार्यान्वयन, औद्योगिक संबंध, मजदूरी और वेतन प्रशासन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । कंपनी में नाटकीय परिवर्तन लाने के लिएकर्मचारियों में अपेक्षित मानसिकता को विकसित करने हेतु उन्होंने विभिन्न गतिविधियों को, मुख्य रूप से कई तदनुकूल संचार अभ्यास और आत्म-विश्वास निर्माण उपायों / सत्रों को संचालित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाईहै ।

कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी, स्वच्छ भारतगतिविधि, रणनीतिक प्रबंधन मुद्दें, टाउनशिप मैनेजमेंट, लैंड एंड एस्टेट मामलें, विस्थापित व्यक्तियों के कल्याण (परियोजना प्रभावित व्यक्ति), राष्ट्रपति के निर्देशों और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं के कार्यान्वयन तथा महत्व के कई अन्य क्षेत्रों में उनकी समर्पित भूमिका विशेष महत्व रखती है।