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प्रो. डी. सी. पाणिग्रही, स्वतंत्र निदेशक


प्रो. डी. सी. पाणिग्रही

प्रो. डी. सी. पाणिग्रही ने इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद से 1984 ई. में खनन अभियांत्रिकी में बी.टेक किया । इसके बाद उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद से ही 1990 ई. में खनन अभियांत्रिकी में एम.टेक, तथा 1992 ई. में औद्योगिक इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन में एम. टेक किया । उन्होंने वर्ष 1994 ई. में इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद से खनन अभियांत्रिकी में पीएचडी की । इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद से स्नातक होने के बाद, वे साढ़े तीन साल तक टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड की कोयला खदानों में सहायक प्रबंधक के रूप में, साढ़े 4 बर्ष तक तत्कालीन केंद्रीय खनन शोध संस्थान, धनबाद, सीएसआईआर प्रयोगशाला में वैज्ञानिक के रुप में कार्य किये । तत्पश्चात 1992 ई. में आईएसएम, धनबाद में खनन अभियांत्रिकी विभाग में सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुए । 1998 ई. में खनन अभियांत्रिकी प्रोफेसर के रुप में उनकी पदोन्नति हुई । 2004-2007 के दौरान आईएसएम, धनबाद से आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा के अध्यक्ष रहे । 2007-2010 तक वे इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद में खनन इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष रहे । 9 सितम्बर, 2011 को उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद के निदेशक का पदभार ग्रहण किया ।

उन्होंने खान वेंटिलेशन, खान की आग नियंत्रण, कोल बेड मीथेन और भूमिगत खदान पर्यावरण इंजीनियरिंग से संबंधित अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता अर्जित की है। अपने काम की अवधि के दौरान उन्होंने परियोजना के अग्र-लेखक और समन्वयक के रूप में 13 प्रमुख अनुसंधान परियोजनाओं को निष्पादित किया है, और एकल/मुख्य लेखक के रूप में रिपोर्ट सौंपी है । उन्होंने खान वेंटिलेशन, कोल बेड मीथेन और उप सतह खान पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में 120 शोध पत्र प्रकाशित किये हैं। उन्होंने 9 देशों से प्रतिष्ठित लेखकों के 64 पेपर की एक पुस्तक का संपादन किया है, इस पुस्तक को 2001 में ए.ए. बाल्केमा, रॉटरडैम, नीदरलैंड्स द्वारा प्रकाशित किया गया है । उन्होंने 14 देशों के प्रतिष्ठित लेखकों के 100 पेपर्स की अपनी दूसरी पुस्तक का संपादन किया है और इस पुस्तक को 2009 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साइंस पब्लिसर्स द्वारा प्रकाशित किया गया है । उन्होंने खनन अभियांत्रिकी में 10 छात्रों को पीएचडी डिग्री और 12 छात्रों को एम.टेक की डिग्री के लिए मार्ग दर्शन किया है । वर्तमान में वे खनन अभियांत्रिकी में पीएचडी डिग्री के लिए 3 छात्रों का मार्गदर्शन कर रहे हैं । उन्होंने 50 विभिन्न संगठनों के वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने हेतु 319 से अधिक उद्योग प्रायोजित परियोजनाओं का नेतृत्व एवं समन्वयक रुप में सफलतापूर्वक निष्पादन किया है और एकल/अग्र-लेखक के रूप में रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं । प्रो पाणिग्रही सतह से 1.2 कि.मी की गहराई तक देश की अधिकांश जटिल कोयला, धातु और यूरेनियम खानों के लिए वेंटिलेशन सिस्टम डिजाइन तैयार किये हैं और इन कंपनियों को लाभ अर्जित कराने के लिए खानों में उनके कार्यान्वयन हेतु उन कंपनियों के साथ जुड़े रहे ।

प्रोफेसर पाणिग्रही को 1997 में विश्व की 11 प्रमुख खनिज उत्पादक देशों अर्थात् संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्रांस, चीन और भारत द्वारा गठित 11 सदस्यों वाली इंटरनेशनल माइन वेंटिलेशन समिति के एक सदस्य के रूप में नामित किया गया । वे 2009-14 तक इस समिति के अध्यक्ष भी रहे। वे वर्ष 1997 से माइनिंग थर्मोफिजीकस ऑफ इंटरनेशनल ब्यूरो के मानद सदस्य हैं तथा वर्ष 2002 से पोलिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, पोलैंड द्वारा प्रकाशित खनन साइंसेज के जर्नल आर्काइव्स के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं । उन्हें पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका में 7 वीं व 10 वीं अंतर्राष्ट्रीय खान वेंटिलेशन कांग्रेस में तकनीकी सत्र के लिए आमंत्रित किया गया था । इन्हें दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमरीका से 2014 में विदेश में भारतीय शिक्षा के योगदान के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है । प्रोफेसर पाणिग्रही को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स, कोलार गोल्ड फील्ड्स, कर्नाटक के गवर्निंग बॉडी और जेनेरल बॉडी का सदस्य; भारतीय विश्वविद्यालय एसोसिएशन के गवर्निंग काउंसिल, नई दिल्ली का सदस्य; मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के तहत झारखंड के केंद्रीय विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद का सदस्य; भारत के प्रधानमंत्री द्वारा गठित राष्ट्रीय नवोन्मेष परिषद के तहत श्रम और रोजगार मंत्रालय के व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की क्षेत्रीय नवाचार परिषद का अध्यक्ष; देश के खनन और खनिज क्षेत्र में सुरक्षा और स्वास्थ्य पर नियम तथा विनियम तैयार करने हेतु खान अधिनियम के तहत श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित सेक्सन 12 समिति का सदस्य; भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली बढ़ती खाई को पाटने के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत गठित देश के खनन और खनिज क्षेत्र के मेंटर काउंसिल का सदस्य मनोनीत किया गया है । वे खान मंत्रालय, भारत सरकार के PERC (परियोजना मूल्यांकन और समीक्षा समिति) और SSAG (स्थायी वैज्ञानिक सलाहकार समूह) के सदस्य भी हैं । इन्हें 1994 में न्यू केन्दा खान में हुए आपदा, जिसमें 55 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी, के लिए उत्तरदायी समस्याओं के अध्ययन के गठित विशेषज्ञ समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है, और इन्हें 2010 में अंजन हिल खान आपदा, जिसमें 14 लोगों की मृत्यु और 34 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, के विशेषज्ञ समिति के सदस्य के रूप में भी कोयला मंत्रालय द्वारा चुना गया था ।

भारत में खनन उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान देने और विशिष्ट सेवा प्रदान करने के लिए प्रोफेसर पाणिग्रही को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जैसे- खान और खनिज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार -1998; आईएसएम, धनबाद द्वारा S.S.B. मेमोरियल अवार्ड - 2005; 2005 में टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा ASPIRE मान्यता; राष्ट्रीय डिजाइन और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स की रिसर्च फोरम द्वारा 27वें भारतीय इंजीनियरिंग कांग्रेस के दौरान विज्ञान भवन (भारत) में राष्ट्रीय डिजाइन पुरस्कार - 2012; 2012 में कोलकाता में खनन इंजीनियरों के 23वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रख्यात खनन अभियंता पुरस्कार; भारत के माननीय राष्ट्रपति की उपस्थिति में 10 मई, 2014 को इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद, के दीक्षांत समारोह के दौरान वर्ष 2012-13 का भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता पुरस्कार; भारत के माननीय राष्ट्रपति की उपस्थिति में 10 मई, 2014 को इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद, के दीक्षांत समारोह के दौरान वर्ष 2012-13 का आईएसएम पूर्व छात्र संघ पुरस्कार; खनन शिक्षा एवं अनुसंधान क्षेत्र में योगदान के लिए भारतीय खनन अभियांत्रिकी जर्नल स्वर्ण जयंती पुरस्कार - 2012; 22 मई 2012 को भुवनेश्वर, ओडिशा में भारतीय खनिज उद्योग जर्नल के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह के दौरान वर्ष 2011-12 के लिए देबदत्ता मेमोरियल बेस्ट शैक्षिक प्रबंधन उत्कृष्टता पुरस्कार; 23 फ़रवरी, 2013 को इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद, के दीक्षांत समारोह के दौरान वर्ष 2011-12 का भारतीय स्टेट बैंक सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता पुरस्कार; खनन अभियांत्रिकी में शिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए माइनिंग, जियोलाजिकल एंड मैटलर्जिकल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा वर्ष 2013-14 के लिए प्रोफेसर एस.के. बोस मेमोरियल पुरस्कार; इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत) के जर्नल में पेपर्स के प्रकाशन के लिए इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत) द्वारा वर्ष 2004-05 का योग्यता प्रमाण पत्र; 1979 ई. में इंटरमीडिएट विज्ञान में विश्वविद्यालय में पहला स्थान हासिल करने के लिए गोपाबंधु मेमोरियल शील्ड ।