शुक्रवार 03 अप्रैल 2020                   आज का शब्द – AUTHORISED | प्राधिकृत
GO
en-US|hi-IN
 

कंपनी के बारे में

राज्य के स्वामित्व वाली कोयला खनन निगम कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) नवंबर, 1975 में अस्तित्व में आया । अपनी स्थापना के वर्ष में 79 मिलियन टन (एमटी) के साधारण उत्पादन के साथ कोल इण्डिया लिमिटेड आज विश्व का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक तथा सबसे बड़े कॉर्पोरेट नियोक्ता में से एक है। 83 खनन क्षेत्रों के माध्यम से परिचालित, 7 पूर्ण स्वामित्व वाली कोयला उत्पादक अनुषंगियों और 1 खनन योजना एवं परामर्श कंपनी द्वारा भारत के 8 प्रांतीय राज्यों में फैला सीआईएल एक शीर्ष निकाय है । सीआईएल अन्य प्रतिष्ठानों अर्थात कार्यशालाओं, अस्पतालों आदि का भी प्रबंधन करता है । इसके अतिरिक्त, 27 तकनीकी व प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान तथा 76 व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान केंद्र भी हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (आईआईसीएम), एक अत्याधुनिक प्रबंधन प्रशिक्षण 'उत्कृष्ट केंद्र' के रूप में - भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण संस्थान - सीआईएल द्वारा संचालित होता है तथा यह बहु-अनुशासनिक प्रबंधन विकास कार्यक्रम आयोजित करता है ।

सीआईएल एक महारत्न कंपनी है - राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों का परिचालन विस्तार एवं वैश्विक दिग्गज के रूप में उभरने हेतु भारत सरकार द्वारा विशेषाधिकार प्राप्त है । यह देश के तीन सौ से अधिक केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों में चुनिंदा क्लब जिसमें केवल दस सदस्य में से एक है ।  

कोल इंडिया लिमिटेड की भारतीय उत्पादक अनुषंगी कंपनियां:

  • ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल)
  • भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल)
  • सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल)
  • वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल)
  • साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल)
  • नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल)
  • महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल)

कोल इंडिया लिमिटेड की एक खान योजना और परामर्श कंपनी – सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) है । इसके अतिरिक्त, सीआईएल की मोजाम्बिक में कोल इंडिया अफ्रीकाना लिमिटाडा (सीआईएएल) नामक एक विदेशी अनुषंगी कंपनी है। असम में अर्थात नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स की खदानों का प्रबंधन प्रत्यक्ष रूप से सीआईएल द्वारा किया जाता है।

महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की चार (4) अनुषंगियाँ निम्न हैं

  • एमजेएसजे कोल लिमिटेड
  • एमएनएच शक्ति लिमिटेड
  • महानदी बेसिन पावर लिमिटेड
  • नीलांचल पावर ट्रांसमिशन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड

एसईसीएल की दो अनुषंगियाँ हैं

  • मैसर्स छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल)
  • मैसर्स छत्तीसगढ़ ईस्ट - वेस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईडब्ल्यूआरएल)

सीसीएल की एक अनुषंगी कंपनी - झारखंड सेंट्रल रेलवे लिमिटेड है ।

 

अद्वितीय कार्यकुशलता

भारत के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 83% का उत्पादनकर्ता, जिसमें लगभग 57% प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा कोयले पर निर्भर है, सीआईएल अकेले प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकता का 40% की आपूर्ति करता है। 2040 तक 48-54% के अधिकतम स्तर पर कोयले की हिस्सेदारी बने रहने की संभावना है । उपयोगिता क्षेत्र में थर्मल पावर जनरेटिंग क्षमता का कुल 76% हेतु जवाबदेहीता है। अंतरराष्ट्रीय मूल्यों से रियायती कीमतों पर कोयले की आपूर्ति करता है । भारतीय कोयला उपभोक्ताओं को मूल्य अस्थिरता से रक्षा करना । अंतप्रयोगी उद्योग के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना । "मेक इन इंडिया" और भारत निर्माण द्वारा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना ।

उत्पादन और विकास

2018-19 के दौरान, सीआईएल ने विगत वर्ष की तुलना में 39.52 मिलियन टन की वृद्धि करते हुए 606.89 मिलियन टन (एमटी) कोयले का उत्पादन किया है । सीआईएल ने कोयला उत्पादन में विगत वर्ष की तुलना में 6.97% की वृद्धि दर्ज करते हुए पहली बार 600 मिलियन टन (एमटी) के मार्क को पार किया है। वर्ष के दौरान कोयला उत्पादन में लगभग 7% की वृद्धि रही है, विगत वित्त वर्ष के उत्पादन वृद्धि 2.4% की तुलना में लगभग तीन गुना वृद्धि रही है। यह उल्लेखनीय है कि सीआईएल ने केवल तीन वर्षों में 500 मिलियन टन से 600 मिलियन टन की छलांग लगाई है जबकि कंपनी को 400 मिलियन टन से 500 मिलियन टन की सीमा तय करने में सात वर्ष लग गया है। 31 मार्च 2019 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कच्चे कोयला का उठाव 608.14 मिलियन टन था, जिसमें विगत वर्ष की तुलना में 27.85 मिलियन टन की वृद्धि हुई है । बिजली उपयोज्यता (विशेष अग्रेषित ई-नीलामी समेत) को कोयला और कोल उत्पाद का प्रेषण 491.54 मिलियन टन रहा है। सीआईएल, राष्ट्र ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। देश की कोयला मांग को पूरा करने के लिए 'विजन 2030' के तहत देश के कोयला क्षेत्र में वित्त वर्ष 24-25 तक लगभग 7.6 प्रतिशत वृद्धि की परिकल्पना की गई है । उत्पादन में अनुमानित वृद्धि हासिल करने के लिए सीआईएल ने प्रमुख परियोजनाओं को चिन्हित तथा उनसे संबंधित मुद्दों का आकलन किया है।

परियोजनाएं

608.5 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली 119 खनन परियोजनाएँ चल रही हैं, जिसने वर्ष 2018-19 में 304.67 मिलियन टन का योगदान दिया है । इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 तक सीआईएल के कोयला उत्पादन को बढ़ाकर 1 बिलियन टन करने के लक्ष्य प्राप्ति हेतु वित्तीय वर्ष 2018-19 में 185.20 मिलियन टन की वार्षिक क्षमता वाले 85 पूर्ण खनन परियोजनाएं को 195 एमटी की लक्षित क्षमता के साथ पचपन (55) नई भविष्य की परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है ।

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी:

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी के विकास तथा कोयले के वैकल्पिक उपयोग की दिशा में पहल हेतु, सीआईएल कोलकाता के समीप दानकुनी कोल कॉम्प्लेक्स (डीसीसी) परिसर में एक कोयला आधारित मेथनॉल संयंत्र स्थापित करने की संभावनाओं को तलाश रहा है । रानीगंज के कोयला क्षेत्रों से प्राप्त कोयले को सिन्गैस उत्पादन के लिए गैसीकृत किया जाएगा, तदुपरांत उसे मेथनॉल में परिवर्तित किया जाएगा ।

उपभोक्ता संतुष्टि:

सीआईएल के लिए उपभोक्ता संतुष्टि प्राथमिक क्षेत्र पर है तथा खदान से प्रेषण बिंदु तक कोयले की गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाता है। सीआईएल के सभी उपभोक्ताओं को स्वतंत्र तृतीय पक्षीय नमूना एजेंसियों के माध्यम से गुणवत्ता मूल्यांकन कराने का विकल्प है। सीआईएल द्वारा एक पोर्टल 'उत्तम' लॉन्च किया गया है, ताकि कोयला कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को कोयला गुणवत्ता की जानकारी सुलभ हो सके।

विदेश में कोयला परिसंपत्तियों का अधिग्रहण

सीआईएल, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में कोकिंग कोल एसेट प्राप्ति हेतु प्रक्रियाधीन है । ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में कुछ संभावित कोकिंग / सेमी कोकिंग कोयला परिसंपत्तियों को चिन्हित किया गया है।

जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन तक पहुँच

विश्व के अन्य हिस्सों से भिन्न, भारत में कोयला भंडार ज्यादातर जंगली भूमि क्षेत्रों या जनजातीय निवास क्षेत्रों में है । कोयला खनन लोगों को अनिवार्य रूप से विस्थापित करता है, परंतु परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए सीआईएल ने संरचित पुनर्वास और पुनःस्थापन की नीति अपनाई है । कंपनी द्वारा परियोजना प्रभावित लोगों के विकास हेतु आजीविका निर्णय संबंन्धी प्रक्रिया में सामाजिक रूप से सतत समावेशी मॉडल के लिए ‘मानवीयता के साथ खनन' की प्रक्रिया को अपनाया गया है।

पर्यावरण की देखभाल/ पर्यावरण प्रबंधन

कोयला खनन की अंतर्निहित प्रवृत्तियों द्वारा भूमि और पर्यावरण की अवनति होती है। सीआईएल द्वारा खनन गतिविधियों का पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक मुद्दों को लगातार उठाया जाता है । सभी खनन क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल खनन प्रणालियों को अपनाया गया है । पर्यावरणीय शमन उपायों को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए, सीआईएल ने सभी खुली परियोजनाओं में भूमि पुनर्वास और उद्धार हेतु अत्याधुनिक उपग्रह द्वारा निगरानी की शुरुआत की है । कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों द्वारा प्रति वर्ष वृक्षारोपण कार्यक्रमों के माध्यम वृक्षारोपण और ग्रीन बेल्ट व्यापक रूप से विकसित किए गये हैं । मार्च 2019 तक सीआईएल की अनुषंगी कंपनियों द्वारा लगभग 97.65 मिलियन वृक्ष लगाकर 39029 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को आच्छादित किया गया है । 2018-19 के दौरान, लीजहोल्ड क्षेत्र में 733 हेक्टेयर भूमि पर 1.81 मिलियन वृक्ष तथा लीजहोल्ड क्षेत्र के बाहर 225 हेक्टेयर भूमि पर 0.36 मिलियन वृक्ष लगाए गए है । सीआईएल सुसंरक्षित पर्यावरण प्रबंधन योजनाओं और सतत विकास गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण पर कोयला खनन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है ।

सीआईएल मुख्यालय ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से आईएसओ 9001, 14001 और 50001 (गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) के लिए प्रमाणन प्राप्त किया है । 31 मार्च 2019 तक, हमारी चार अनुषंगी, ईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और एमसीएल एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ 9001, 14001 और ओएचएसएएस 18001) से प्रमाणित हैं। सीएमपीडीआई मुख्यालय तथा इसके सात आरआई आईएसओ 9001: 2015 से प्रमाणित हैं।

ऊर्जा संरक्षण

ऊर्जा का संरक्षण सीआईएल / अनुषंगी कंपनियां के प्राथमिकता वाला क्षेत्र है तथा विशिष्ट ऊर्जा खपत में कमी की दिशा में विभिन्न उपाय किए गए हैं। सीआईएल वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का भी उपयोग कर रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत हेतु कई कदम उठाए गए हैं जैसे कि किलो-वाट स्केल रूफ टॉप सोलर प्लांट सफल संचालन में हैं। सीआईएल, कॉर्पोरेट कार्यालय न्यूटाउन, कोलकाता में (160kWp), सीएमपीडीआई मुख्यालय और क्षेत्रीय संस्थान (351 kWp), ईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में (159 kWp), डब्ल्यूसीएल के विभिन्न क्षेत्रों (1097 kWp), मुख्यालय कार्यालय भवन, सीसीएल (477.5 kWp) और एनईसी (12 kWp) है ।

ईंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी)

सीआईएल, सीआईएल तथा उसकी अनुषंगी कंपनियों में एक मजबूत अत्याधुनिक ईंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग तथा अस्पताल प्रबंधन प्रणाली के डिजाइन एवं कार्यान्वयन के मार्ग पर है। इस प्रयास का उद्देश्य व्यापार प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं के मानकीकरण के माध्यम से व्यावसायिक संचालन के सभी पहलुओं को एकीकृत कर एक एकल उपयोगी सरल प्रणाली तथा सभी संगठनात्मक संसाधनों का प्रभावी ढंग से योजना, प्रबंधन एवं सुधार करना है ।