GO
en-US|hi-IN
 

कंपनी के बारे में

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) राज्य के स्वामित्व वाली कोयला खनन निगम नवंबर 1975 में अस्तित्व में आया । अपनी स्थापना के वर्ष में 79 मिलियन टन (एमटी) के साधारण उत्पादन के साथ कोल इण्डिया लिमिटेड आज दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है । 82 खनन क्षेत्रों के माध्यम से परिचालित, 7 पूर्ण स्वामित्व वाली कोयला उत्पादक अनुषंगियों और 1 खनन योजना एवं परामर्श कंपनी द्वारा भारत के 8 प्रांतीय राज्यों में फैला सीआईएल एक शीर्ष निकाय है । सीआईएल द्वारा 200 अन्य प्रतिष्ठानों यथा कार्यशालाओं, अस्पतालों का प्रबंधन करता है । इसके अतिरिक्त, 26 तकनीकी व प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान तथा 102 व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान केंद्र भी हैं । इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (आईआईसीएम), एक अत्याधुनिक प्रबंधन प्रशिक्षण 'उत्कृष्ट केंद्र'  के रूप में - भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण संस्थान - सीआईएल द्वारा संचालित होता है तथा बहु-अनुशासनिक प्रबंधन विकास कार्यक्रम आयोजित करता है ।

सीआईएल एक महारत्न कंपनी है - राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों का परिचालन विस्तार एवं वैश्विक दिग्गज के रूप में उभरने हेतु भारत सरकार द्वारा विशेषाधिकार प्राप्त है । यह देश के केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों की श्रेणी में कुछ चुनिंदा उद्धमों में से एक है ।  

कोल इंडिया लिमिटेड की भारतीय उत्पादक सहायक कंपनियां:

  • ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल)
  • भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल)
  • सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल)
  • वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल)
  • साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल)
  • नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल)
  • महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल)

कोल इंडिया लिमिटेड की एक खान योजना और परामर्श कंपनी – सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) है ।

 

अद्वितीय कार्यकुशलता

भारत के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 84% उत्पादन करता है ।

भारत में जहां लगभग 57% प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा कोयले पर निर्भर है, सीआईएल अकेले प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकता का 40% की आपूर्ति करता है ।

2040 तक 48-54% के अधिकतम स्तर पर कोयले की हिस्सेदारी रहने की संभावना है ।

उपयोगिता क्षेत्र के कुल थर्मल पावर जनरेटिंग क्षमता का 76% की ज़िम्मेदारी उठाना ।

अंतरराष्ट्रीय मूल्यों से रियायती कीमतों पर कोयले की आपूर्ति करना ।

भारतीय कोयला उपभोक्ताओं को मूल्य अस्थिरता से रक्षा करना ।

अंतप्रयोगी उद्योग के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना ।

"मेक इन इंडिया" और भारत निर्माण द्वारा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना ।

उत्पादन और विकास

2016-17 के दौरान, सीआईएल ने विगत वर्ष की तुलना में 15.39 मिलियन टन की वृद्धि करते हुए 554.14 मिलियन टन (एमटी) कोयले का उत्पादन किया है ।  2012-13 के 452.21 मिलियन टन से वर्तमान स्तर तक विगत पाँच वर्षों की अवधि में कोयला उत्पादन में 100 मिलियन टन से अधिक की परिमाणात्मक वृद्धि हुई है ।

31 मार्च 2017 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कच्चे कोयला का उठाव 543.32 मिलियन टन था, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 8.82 मिलियन टन की वृद्धि हुई है । बिजली उपयोज्यता (विशेष अग्रेषित ई-नीलामी समेत) को कोयला और कोल उत्पाद का प्रेषण 425.40 मिलियन रहा है । लेकिन कई जेनकोस द्वारा कोयले के निरंतर उपयोग किये जाने से बिजली क्षेत्र में कोयले का प्रेषण उच्च हो सकता था ।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सशक्तिकरण  

यह सुस्पष्ट दिखाई देता है कि भारत में, स्वदेशी उत्पादन बढ़ती घरेलू कोयले की मांग से कोसो दूर है । मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर काफी हद तक बढ़ रहा है, - विशेष रूप से बिजली क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता वृद्धि के बाद, जो मुख्यतः कोयले पर निर्भर है ।

सीआईएल ने बहु-प्रवृत्त दृष्टिकोण के माध्यम से देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के हित में स्वयं को लगाया है, खुली खानों और भूमिगत खानों में आवश्यकता के अनुरूप नवीनतम खनन तकनीक को अपनाया जा रहा है । कोल इंडिया खान स्तर तक सीधे परिचालन प्रयासों की निगरानी भी कर रहा है । विभिन्न मंत्रालयों और राज्य प्राधिकरणों के साथ परियोजना से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण कार्रवाइयाँ की नियमित निगरानी की जा रही हैं ।

इस चुनौती के महत्व से क्षेत्र तथा खान स्तर तक के कर्मचारियों को भी संवेदनशील बनाया गया है ।

परियोजनाएं

576.02 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली 116 खनन परियोजनाएं चल रही हैं, जिन्होंने वर्ष 2016-17 में 243.98 मिलियन टन का योगदान दिया है ।

इसके अलावा, सीआईएल में 263.36 मिलियन टन की वार्षिक क्षमता वाले 130 पूर्ण खनन परियोजनाएं हैं ।

वर्ष 2017-18 में 839.38 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीआई) की उच्च क्षमता वाली 246 कोयला खनन परियोजनाएं को शुरु करने हेतु चिन्हित किया गया है । 

कोयला स्वच्छता हेतु पहल:

कोयला आधारित मीथेन निष्कर्षण: दो परियोजनाएं यथा ‘कोलेबोरेटिव डेवलोपमेंट आफ सीबीएम' और एक निरूपण परियोजना 'सीबीएम रिकवरी एंड कमर्शियल यूटिलाईजेशन' के नाम से कार्यान्वित की जा रही है ।

सीएमएम / एएमएम निष्कर्षण: ‘‘डेवलोपमेंट आफ केपेसिटी फार डेलीनेशन आफ वायेबल सीएमएम / एएमएम” - नाम से एक अनुसंधान और विकास परियोजना प्रगति पर है ।

वेंटिलेशन एयर मीथेन (वीएएम): वायुमंडल में मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए, वेंटिलेशन एयर मीथेन (वीएएम) द्वारा रोका और उपयोग किया जा सकता है । रिटर्न एयर में मिथेन (CH4) और अन्य अस्थिर कार्बनिक यौगिकों के नमूने का विश्लेषण करने हेतु प्रौद्योगिकियों का क्रय सीआईएल में प्रक्रियाधीन है ।

भूमिगत कोयला गैसीफिकेशन (यूसीजी): सीआईएल ने सहयोगी विकास हेतु यूसीजी के 2 ब्लॉक को चिन्हित किया है, और प्रौद्योगिकी पार्टनर को चिन्हित करने हेतु एक्सप्रेशन आफ इन्टरेस्ट जारी किया गया है ।

जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन तक पहुँचना  

विश्व के अन्य हिस्सों से भिन्न, भारत में कोयला भंडार ज्यादातर जंगल भूमि या जनजातीय निवास क्षेत्रों में है । कोयला खनन लोगों को अनिवार्य रूप से विस्थापित करता है, परंतु परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए सीआईएल ने संरचित पुनर्वास और पुनःस्थापन की नीति अपनाई है । कंपनी द्वारा परियोजना प्रभावित लोगों के विकास हेतु आजीविका निर्णय संबंन्धी प्रक्रिया में सामाजिक रूप से सतत समावेशी मॉडल  ‘मानवीयता के साथ खनन' की प्रक्रिया को अपनाया गया है।

पर्यावरण की देखभाल

कोयला खनन की अंतर्निहित प्रवृत्तियों द्वारा भूमि और पर्यावरण की अवनति होती है। सीआईएल द्वारा खनन गतिविधियों का पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक मुद्दों को लगातार उठाया जाता है । सभी खनन क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल खनन प्रणालियों को अपनाया गया है । पर्यावरणीय शमन उपायों को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए, सीआईएल ने सभी खुली परियोजनाओं में भूमि पुनर्वास और उद्धार हेतु अत्याधुनिक उपग्रह द्वारा निगरानी की शुरुआत की है ।

कोल इंडिया की सहायक कंपनियों द्वारा प्रति वर्ष वृक्षारोपण कार्यक्रमों के माध्यम वृक्षारोपण और ग्रीन बेल्ट व्यापक रूप से विकसित किए गये हैं । सीआईएल की सहायक कंपनियों द्वारा लगभग 94.016 मिलियन वृक्ष लगाकर 37,557.46 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को आच्छादित किया गया है । 2016-17 के दौरान मार्च 2017 तक 1.66 मिलियन वृक्ष द्वारा 661.20 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया हैं ।

सुसंरक्षित पर्यावरण प्रबंधन योजनाओं और सतत विकास गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण पर कोयला खनन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है ।

सीआईएल ने गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ: 9001) के साथ पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ: 14001) का समाकलन शुरू किया है और अभी तक ईसीएल, एनसीएल, एमसीएल, सीएमपीडीआई और सीआईएल मुख्यालय  द्वारा सफलतापूर्वक प्रमाणन प्राप्त किया गया है । अन्य शेष अनुषंगी कंपनियों में भी चरणवार इस समाकलन को आगे बढ़ाया जा रहा है ।

paykasa bozdurma